Best Motivational Stories in Hindi. कहानियां जो आपकी जिंदगी बदल दें।

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Best Motivational Stories in Hindi

If you also like to read inspirational stories, they have come to the right place, today I have brought for you such stories. After reading them you will be filled with confidence. These stories will convince you of life truths. These are stories that will change the view of living your life. Best Motivational Stories in Hindi.

👌दुनियाँ बदलने के लिए खुद को बदलिये👌

★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★

एक बार की बात है किसी दूर राज्य में राजा शासन करता था।
उसके राज्य में सारी प्रजा बहुत संपन्न थी किसी को कोई भी दुःख नहीं था
ना ही किसी का कोई ऋण था।
राजा के पास भी खजाने की कमी नहीं थी वह बहुत वैभवशाली जीवन जीता था।

एक बार राजा के मन में ख्याल आया कि क्यों ना अपने राज्य का निरिक्षण किया जाये,
देखा जाये कि राज्य में क्या चल रहा है और लोग कैसे रह रहे हैं।
तो राजा ने कुछ सोचकर निश्चय किया कि वह बिना किसी वाहन के पैदल ही भेष राज्य में घूमेगा जिससे वो लोगों की बातें सुन सके और उनके विचार जान सके । फिर अगले दिन से ही राजा भेष बदल कर अकेला ही राज्य में घूमने निकल गया उसे कहीं कोई दुखी व्यक्ति दिखाई नहीं दिया फिर धीरे धीरे उसने अपने कई किलों और भवनों का निरिक्षण भी किया।

जब राजा वापस लौटा तो वह खुश था कि उसका राज्य संपन्न है लेकिन अब उसके पैरों में बहुत दर्द था क्युकी ये पहला मौका था जब राजा इतना ज्यादा पैदल चला हो । उसने तुरंत अपने मंत्री को बुलाया और कहा – राज्य में सड़के इतने कठोर पत्थर की क्यों बनाई हुई हैं देखो मेरे पैरों में घाव हो गए हैं, मैं इसी वक्त आदेश देता हूँ कि पुरे राज्य में सड़कों पे चमड़ा बिछवा दिया जाये जिससे चलने में कोई दिक्कत नहीं होगी। मंत्री यह सुनते की सन्न रह गया, बोला – महाराज इतना सारा चमड़ा कहाँ से आएगा और इतने चमड़े के लिए ना जाने कितने जानवरों की हत्या करनी पड़ेगी और पैसा भी बहुत लगेगा। राजा को लगा कि मंत्री उसकी बात ना मान कर उसका अपमान कर रहा है, इसपर राजा ने कहा- आपको जो आदेश दिया गया उसका पालन करो देखो मेरे पैरों में पत्थर की सड़क पे चलने से कितना दर्द हो रहा है।

मंत्री बहुत बुद्धिमान था, मंत्री ने शांत स्वर में कहा – महाराज पुरे राज्य में सड़क पर चमड़ा बिछवाने से अच्छा है आप चमड़े के जूते क्यों नहीं खरीद लेते। मंत्री की बात सुनते ही राजा निशब्द सा होकर रह गया।

मित्रों इसी तरह हम रोज अपनी जिंदगी में ना जाने कितनी परेशानियों को झेलते हैं और हम सारी परेशानियों के लिए हमेशा दूसरों को दोषी ठहराते हैं, कुछ लोगों को तो दुनिया की हर चीज़ और हर व्यवस्था में दोष दिखाई देता है। हम सोचते हैं कि फलां आदमी की वजह से आज मेरा वो काम बिगड़ गया या फलां व्यक्ति की वजह से मैं आज ऑफिस के लिए लेट हो गया या फलां व्यक्ति की वजह से मैं फेल हो गया, सड़क पर पड़े कूड़े को देखकर सभी लोग नाक पर रुमाल रखकर दूसरों को गलियां देते हुए निकल जाते हैं लेकिन कभी खुद सफाई के लिए आगे नहीं आ पाते वगैहरा वगैहरा। लेकिन हम कभी खुद को सुधारने की कोशिश नहीं करते, कभी खुद परिवर्तन का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं करते। मित्रों एक एक बूंद से घड़ा भरता है और आपका प्रयास एक बूंद ही सही लेकिन वो बूंद घड़ा भरने के लिए बहुत जरुरी है। दूसरों को दोष देना छोड़िये और खुद को परिवर्तन करिये फिर देखिये दुनियाँ खुद परिवर्तन हो जाएगी🙏💐🙏


🌹 समय की परख🌹. Motivational Story

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बहुत समय पहले की बात है। आइसलैंड के उत्तरी छोर पर एक किसान रहता था। उसे अपने 🌾 खेत में काम करने वालों की बड़ी ज़रुरत रहती थी लेकिन ऐसी खतरनाक जगह, जहाँ आए दिन 🌪 आंधी–तूफ़ान आते रहते हों, कोई काम करने को तैयार नहीं होता था।

Best Motivational Stories in Hindi

किसान ने एक दिन शहर के अखबार में इश्तहार दिया कि उसे खेत 🌾 में काम करने वाले एक मजदूर की ज़रुरत है।

किसान से मिलने कई लोग आये लेकिन जो भी उस जगह के बारे में सुनता, वो काम करने से मना कर देता। अंततः एक सामान्य कद का पतला-दुबला अधेड़ व्यक्ति किसान के पास पहुंचा।

किसानश 👴 ने उससे पूछा, “क्या तुम इन परिस्थितियों में काम कर सकते हो ?”

“ह्म्म्म, बस जब 🌪 हवा चलती है, तब मैं सोता हूँ ” व्यक्ति ने उत्तर दिया।

किसान 👴 को उसका उत्तर थोडा अजीब लगा लेकिन चूँकि उसे कोई और काम करने वाला नहीं मिल रहा था। इसलिए उसने व्यक्ति को काम पर रख लिया।

मजदूर मेहनती निकला, वह सुबह से शाम तक खेतों 🌾में मेहनत करता, किसान👴 भी उससे काफी संतुष्ट था।

कुछ ही दिन बीते थे कि एक रात अचानक ही जोर-जोर से हवा 🌪 बहने लगी, किसान अपने अनुभव से समझ गया कि अब तूफ़ान आने वाला है। वह तेजी से उठा, हाथ में लालटेन ली और मजदूर के झोपड़े की तरफ दौड़ा।

“जल्दी उठो, देखते नहीं तूफ़ान आने वाला है, इससे पहले की सबकुछ तबाह हो जाए कटी फसलों को बाँधकर ढक दो और बाड़े के गेट को भी रस्सियों से बाँध दो”, किसान 👴चीखा ।

मजदूर बड़े आराम से पलटा और बोला, “नहीं जनाब, मैंने आपसे पहले ही कहा था कि जब हवा 🌪 चलती है तो मैं सोता हूँ !!!.”

यह सुन किसान👴 का गुस्सा सातवें ☁आसमान पर पहुँच गया, जी में आया कि उस मजदूर को चांटा मार दे, पर अभी वो आने वाले तूफ़ान से चीजों को बचाने के लिए भागा।

“किसान खेत 🌾 में पहुंचा और उसकी आँखें 👀 आश्चर्य से खुली रह गयी, फसल की गांठें अच्छे से बंधी हुई थीं और तिरपाल से ढकी भी थी, उसके 🐄 गाय-बैल सुरक्षित बंधे हुए थे और मुर्गियां 🐓 भी अपने दडबों में थीं… बाड़े का दरवाज़ा भी मजबूती से बंधा हुआ था।

सारी चीजें बिलकुल व्यवस्थित थीं… नुकसान होने की कोई संभावना नहीं बची थी। किसान 👴 अब मजदूर की ये बात कि “जब हवा चलती है तब मैं सोता हूँ… समझ चुका था और अब वो भी चैन से सो सकता था ।

✍ शिक्षा- समय का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि समय से पहले हमें तैयारी करके रखनी चाहिए।


अपना काम स्वयं करें. Motivational Story

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🤗🤗🤗कल दिल्ली से गोवा की उड़ान में एक सज्जन मिले।
साथ में उनकी पत्नि भी थीं।

सज्जन की उम्र करीब 80 साल रही होगी। मैंने पूछा नहीं लेकिन उनकी पत्नी भी 75 पार ही रही होंगी।

उम्र के सहज प्रभाव को छोड़ दें, तो दोनों करीब करीब फिट थे।

पत्नी खिड़की की ओर बैठी थीं सज्जन बीच में और
मै सबसे किनारे वाली सीट पर था।

उड़ान भरने के साथ ही पत्नी ने कुछ खाने का सामान निकाला और पति की ओर किया। पति कांपते हाथों से धीरे-धीरे खाने लगे।

फिर फ्लाइट में जब भोजन सर्व होना शुरू हुआ तो उन लोगों ने राजमा-चावल का ऑर्डर किया।

दोनों बहुत आराम से राजमा-चावल खाते रहे। मैंने पता नहीं क्यों पास्ता ऑर्डर कर दिया था। खैर, मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं जो ऑर्डर करता हूं, मुझे लगता है कि सामने वाले ने मुझसे बेहतर ऑर्डर किया है।
अब बारी थी
कोल्ड ड्रिंक की।

Best Motivational Stories in Hindi

पीने में मैंने कोक का ऑर्डर दिया था।

अपने कैन के ढक्कन को मैंने खोला और धीरे-धीरे पीने लगा।

उन सज्जन ने कोई जूस लिया था।

खाना खाने के बाद जब उन्होंने जूस की बोतल के ढक्कन को खोलना शुरू किया तो ढक्कन खुले ही नहीं।
सज्जन कांपते हाथों से उसे खोलने की कोशिश कर रहे थे।
मैं लगातार उनकी ओर देख रहा था। मुझे लगा कि ढक्कन खोलने में उन्हें मुश्किल आ रही है तो मैंने शिष्टाचार हेतु
कहा कि लाइए…

” मैं खोल देता हूं।”सज्जन ने मेरी ओर देखा, फिर मुस्कुराते हुए कहने लगे कि…

“बेटा ढक्कन तो मुझे ही खोलना होगा।

मैंने कुछ पूछा नहीं,
लेकिन
सवाल भरी निगाहों से उनकी ओर देखा।

यह देख, सज्जन ने आगे कहा

बेटाजी, आज तो आप खोल देंगे।

लेकिन अगली बार..? कौन खोलेगा.?

इसलिए मुझे खुद खोलना आना चाहिए।

पत्नी भी पति की ओर देख रही थीं।

जूस की बोतल का ढक्कन उनसे अभी भी नहीं खुला था।

पर पति लगे रहे और बहुत बार कोशिश कर के उन्होंने ढक्कन खोल ही दिया।
दोनों आराम से जूस पी रहे थे।

मुझे दिल्ली से गोवा की इस उड़ान में
ज़िंदगी का एक सबक मिला।
सज्जन ने मुझे बताया कि उन्होंने..
ये नियम बना रखा है,

कि अपना हर काम वो खुद करेंगे।
घर में बच्चे हैं,
भरा पूरा परिवार है।

सब साथ ही रहते हैं। पर अपनी रोज़ की ज़रूरत के लिये
वे सिर्फ पत्नी की मदद ही लेते हैं, बाकी किसी की नहीं।

वो दोनों एक दूसरे की ज़रूरतों को समझते हैं
सज्जन ने मुझसे कहा कि जितना संभव हो, अपना काम खुद करना चाहिए।

एक बार अगर काम करना छोड़ दूंगा, दूसरों पर निर्भर हुआ तो समझो बेटा कि बिस्तर पर ही पड़ जाऊंगा।

फिर मन हमेशा यही कहेगा कि ये काम इससे करा लूं,

वो काम उससे।

फिर तो चलने के लिए भी दूसरों का सहारा लेना पड़ेगा।

अभी चलने में पांव कांपते हैं, खाने में भी हाथ कांपते हैं, पर जब तक आत्मनिर्भर रह सको, रहना चाहिए।

हम गोवा जा रहे हैं दो दिन वहीं रहेंगे।

हम महीने में एक दो बार ऐसे ही घूमने निकल जाते हैं।

बेटे-बहू कहते हैं कि अकेले मुश्किल होगी,
पर उन्हें कौन समझाए कि
मुश्किल तो तब होगी
जब हम घूमना-फिरना बंद करके खुद को घर में कैद कर लेंगे।
पूरी ज़िंदगी खूब काम किया। अब सब बेटों को दे कर अपने लिए महीने के पैसे तय कर रखे हैं।

और हम दोनों उसी में आराम से घूमते हैं।

जहां जाना होता है एजेंट टिकट बुक करा देते हैं। घर पर टैक्सी आ जाती है। वापिसी में एयरपोर्ट पर भी टैक्सी ही आ जाती है।

होटल में कोई तकलीफ होनी नहीं है।

स्वास्थ्य, उम्रनुसार, एकदम ठीक है।

कभी-कभी जूस की बोतल ही नहीं खुलती।

पर थोड़ा दम लगाओ,
तो वो भी खुल ही जाती है।

मेरी तो आखेँ ही
खुली की खुली रह गई।

मैंने तय किया था
कि इस बार की
उड़ान में लैपटॉप पर एक पूरी फिल्म देख लूंगा।
पर यहां तो मैंने जीवन की फिल्म ही देख ली।

एक वो फिल्म जिसमें जीवन जीने का संदेश छिपा था।

“जब तक हो सके,
आत्मनिर्भर रहो।”
अपना काम,
जहाँ तक संभव हो,
स्वयम् ही करो।💐🙏🏻💐



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